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Tag: dushyant  kumar ki Hindi gazal

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये : दुष्यंत कुमार Kaha to tay tha charagaa harek ghar ke liye dushyant kumar ki gazal

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये : दुष्यंत कुमार

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चले और ...

तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं : दुष्यंत कुमार Tumhare pano ke neeche koi jameen nahi dushyant kumar ki gazal

तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं : दुष्यंत कुमार

तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं मैं बेपनाह अँधेरों को सुब्ह कैसे कहूँ मैं इन नज़ारों का अँधा तमाशबीन नहीं ...

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं : दुष्यंत कुमार Dushyant kumar ghazal in hindi: Nazar nawaaj nazara badal n jaaye kahi

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं :  दुष्यंत कुमार

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है मेरे बयान को बंदिश निगल न ...

दुष्यंत कुमार की हिंदी गजल: इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है Dushyant kumar ghazal in hindi: Is Nadi ki dhaar mai thandi hawa aati to hai

दुष्यंत कुमार की हिंदी गजल: इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तों इस दिए में तेल ...

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